Monday, 10 February 2014

कुछ एहसास


कुछ एहसास
भेजे थे तुमको.....
लौटे तो
बडे मायूस से लगे

बहुत देखा
कहीं भी न मिले
निशान
तेरे छूने के........
पर..........

हर सफहा
बडा नम सा लगा
शायद
साथ लाए थे

तेरी आंखों की नमी
जो तूने
छिपा रखी थी
मुझसे.........

©प्रियंका

3 comments:

  1. Bahut sunder Ehsaas Priyanka Ji! Aapki baki rachnayein bhi utni hi behatareen hai..!!

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  2. आभार अभिलेख जी।

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  3. आपकी बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति
    --
    आपकी इस अभिव्यक्ति की चर्चा कल सोमवार (03-03-2014) को ''एहसास के अनेक रंग'' (चर्चा मंच-1540) पर भी होगी!
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर…!

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