समेट लेते हैं
खामोशियों से चंद अल्फ़ाज़
खुशबुएँ अहसासों की
आँखों का सच और
सादादिली बातों की
कुछ वादे अनकहे
और
यकीन अपने होने का
मुँह चिढ़ाते दूरियों
और हाथों की चंद लकीरों को
ये रिश्ते भी.......
कब अल्फ़ाज़ों के
मुहताज़ हुआ करते हैं!!
-----प्रियंका
खामोशियों से चंद अल्फ़ाज़
खुशबुएँ अहसासों की
आँखों का सच और
सादादिली बातों की
कुछ वादे अनकहे
और
यकीन अपने होने का
मुँह चिढ़ाते दूरियों
और हाथों की चंद लकीरों को
ये रिश्ते भी.......
कब अल्फ़ाज़ों के
मुहताज़ हुआ करते हैं!!
-----प्रियंका