Monday, 14 April 2014

अब कोई कृष्ण न आएगा

भ्रम भय संशय व्याप्त हृदय में
छल कपट का साम्राज्य रचा
षडयंत्र द्वेष की दाहक अग्नि से
क्यों हुई आज संतप्त धरा
अट्टहास चहुं ओर गरजते
कौरव और दुर्योधन के
बदले से अब मापदंड हैं
मानवता और जीवन के
रणभूमि और कर्मभूमि में
कोई उपदेश सुनाएगा
यह कलियुग का महासमर है
अब कोई कृष्ण आएगा

दुर्योधन के पक्ष में बैठे
स्तम्भ यहां देखो सारे
दुःशासन का उत्साह बढाते
यह नीति रीति के सब मारे
बाध्य बने इन वीरों को
कैसे हम निर्दोष कहें
पूर्ण समर्पित शकुनि का
क्यों हम कोई दोष कहें
हर युग में एक युधिष्ठिर
पत्नी का दंव लगाएगा
यह कलियुग का महासमर है
अब कोई कृष्ण आएगा


द्रौपदियां कितने रूपों में
अपमानित आज भी होती हैं
करती हैं करबद्घ निवेदन
रेखाओं पर भाग्य की रोती हैं
पूर्व हुई उन आहुतियों से
दीपशिखा बन जाना होगा
करनी होगी स्वयं की रक्षा
दुर्गा रूप दिखाना होगा
कापुरूषों की टोली से अब
कोई लाज बचाएगा
यह कलियुग का महासमर है
अब कोई कृष्ण आएगा
            ----प्रियंका





7 comments:

  1. बदले से अब मापदंड हैं
    मानवता और जीवन के
    रणभूमि और कर्मभूमि में
    न कोई उपदेश सुनाएगा
    यह कलियुग का महासमर है
    अब कोई कृष्ण न आएगा ...nihayat hi khubsurat rachna aapki samruddh lekhni se avtarit hui hai ..bhaut badhayi priyanka pandey ji ...

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  2. काश कोई कृष्ण फिर से अवतरित होते ........

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  3. अति सुंदर लिखा हैं.. सत्य हैं की अब कृष्णा नहीं आएगा पर ये भी सत्य हैं की नारी जब काली दुर्गा का रूप धरना चालू कर देंगी तो कृष्णा भी आयेगा.. क्यूंकि जब तक नारी खुद को कमजोर समझना बंद नहीं करेगी तब तक न कृष्णा आएगा ना ही कोई बदलाव का शमा बंधेगा...

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