Sunday, 1 March 2015

सूना हर क्षड तेरी सुधियों बिन

मनभावन मोहक मधुरिम सी
हंसती खिलती मन में बसती
पुलकित जीवन प्रमुदित पल छिन
सूना हर क्षड तेरी सुधियों बिन
अरुणोदय की किरणों सी स्मित
सपनों के तारो से ज्यों अंकित
कभी मधुर मधुर हो कभी विकल
नित नव अनुभुति से विह्वल
रचतीं नींदें सजते से दिन
सुना हर क्षड़ तेरी सुधियों बिन
स्मृतियों की लहरों में बहकर
आ जाते मोती दृग पुलिनों पर
हो नेह पुष्प से सुरभित मन
आशा से प्रमुदित उर उपवन
इक आस धरे कट जाते दिन
सूना हर क्षड़ तेरी सुधियों बिन
-----प्रियंका पांडे

ख्वाहिशें..................... बेमानी सी

जिद कोई चांद तोडने की
या छूने की आसमान
कभी लकीरों को मुंह चिढाती
तकदीर से लडने चलती
कभी खामोश कभी मायूस
कभी खुशियों से लबरेज
भूल जाया करती हैं
झूठे हौसलों में खुद को
कुछहौसले उडना भूल जाते हैं
कुछ को उडने की इजाजत ही नहीं
बडी मासूम और नादान हुआ करती हैं
कुछ ख्वाहिशें.....................
बेमानी सी...........
-----प्रियंका
मन छूना चाहता है आकाश
भरता है उड़ान
बाधाए काल गति की
कब रोक पायी हैं
रफ़्तार हौसलों की
पंखों तुमको इज़ाज़त नहीं
रुकने की
तय करना है
अंतहीन सफ़र
पानी हैं मंजिलें
और मुझे भरोसा है
पंखों से ज्यादा
खुद पर...........
----प्रियंका
टूट कर बिखर गए हैं कुछ पीले पत्ते तुम्हारी यादों के
बहुत कोशिश की सहेज कर रख लूं उन्हें पर...........
वक्त की तेज हवा उन्हें ले ही गई दूर मुझसे
धीरे धीरे निगाहों से ओझल होते देखती रही बस
तुम ही तो कहते थे.....
दुनिया में हमेशा के लिए कुछ भी नहीं रहता........
मालूम है मुझको भी....
पर मेरे जीवन का ये पेड आज भी इंतजार में है
तुम्हारी यादों की नई कोंपलों की
ठूंठ खडा सोचता है कि तुम्हारे आने की नई बहारों के साथ
खिलेंगे कुछ उजले फूल इन पर भी कभी.
बीत जाएगा उदासी से भरा ये पतझड़ भी
मुझे बस यकीन है तुम्हारी बातों पर...........
दुनिया में हमेशा के लिए कुछ भी नहीं रहता.................
--------------प्रियंका
साथ चल ना पाओ तो बस इक पैगाम दे देना
हमारे तनहा जीने का कोई सामान दे देना
वफाये रास ना आये नहीं मायूस तुम होना
कोई बस एक अच्छा सा मुझे इलज़ाम दे देना
तिजारत करती है दुनिया नहीं हर चीज़ बिकती है
मेरे सारे अश्कों का हो सके तुम दाम दे देना
गयी है साथ ही तेरे हंसी भी मेरे होंठो की
कभी जो गर मिले तुमको मेरा पैगाम दे देना
बहुत छोटी सी खुशियाँ हैं नहीं है आरज़ू ज्यादा
कभी जो सिर्फ मेरी थी वही बस शाम दे देना
बहुत है सादा दिल मेरा नहीं है जानता धोखे
लम्हे साथ जो गुज़रे मुहब्बत नाम दे देना
कभी जो लौट पाओ तो गुज़ारिश है चले आना
वफाओं का मेरी हमदम बस अंजाम दे देना
-----प्रियंका.